उज्जैन, 25 सितम्बर। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विकासखंड महिदपुर के ग्राम घोंसला की श्रीमती प्रकाश दीदी आज ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरणादायक कहानी बन गई हैं। पांचवीं तक शिक्षित प्रकाश दीदी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने परिवार को गरीबी के चक्र से बाहर निकाला, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आजीविका के नए अवसर दिए हैं।

समूह से जुड़ने से पूर्व प्रकाश दीदी के परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की मासिक आय मात्र 8,000 रुपये थी तथा उनकी व्यक्तिगत आय शून्य थी। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और परिवार को अच्छा जीवन स्तर उपलब्ध कराने की चिंता उन्हें निरंतर सताती रहती थी।

समूह से जुड़ाव और क्षमतावर्धन वर्ष 2023 में आजीविका मिशन की टीम द्वारा ग्राम में स्व-सहायता समूह गठन के दौरान प्रकाश दीदी ने योजना को समझा और अपने मोहल्ले की 12 महिलाओं के साथ 14 जून 2023 को “खुशबू आजीविका स्व-सहायता समूह” का गठन किया। वे समूह की अध्यक्ष बनीं। समूह “घोंसला आजीविका ग्राम संगठन” तथा “प्रेरणा संकुल स्तरीय संगठन, घोंसला” से संबद्ध है।

समूह के माध्यम से उन्होंने बुक कीपर, लखपति दीदी एवं उद्यम सखी का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा आजीविका सीआरपी के रूप में कार्य प्रारंभ किया। ग्राम संगठन एवं सीएलएफ से नवीन आजीविका गतिविधियों तथा सरल ऋण प्रक्रिया की जानकारी मिलने से उनके आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

आर्थिक सशक्तिकरण की यात्रा प्रकाश दीदी ने समूह से प्राप्त रिवॉल्विंग फंड 2,000 रुपये, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) 10,000 रुपये तथा सीसीएल 50,000 रुपये के साथ समूह से व्यक्तिगत ऋण 50,000 रुपये लेकर जनरल स्टोर की शुरुआत की। परिवार के सहयोग से वे सीएलएफ में सीआरपी का कार्य भी नियमित रूप से करने लगीं। वर्ष 2025-26 में समूह को गेहूं उपार्जन कार्य मिला, जिससे समूह की समस्त महिलाओं को आर्थिक लाभ हुआ।

इसी क्रम में प्रकाश दीदी ने ग्राम घोंसला में टिफिन सेंटर प्रारंभ किया और अपनी समूह की चार दीदियों को रोजगार दिया। जिला पंचायत द्वारा आयोजित राखी मेले में उन्होंने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई, जिससे परिवार की आय और मजबूत हुई। आज उनकी व्यक्तिगत मासिक आय लगभग 15,000 रुपये तथा परिवार की मासिक आय लगभग 22,000 रुपये हो गई है। लाड़ली बहना योजना तथा गेहूं उपार्जन कार्य का भी उन्हें लाभ मिला है।

सीआरपी कार्य एवं विविध आजीविका गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने गरीबी से बाहर निकलने का ठोस मार्ग अपनाया है और ग्राम की अन्य महिलाओं को भी आजीविका मिशन से जोड़ने के लिए जागरूक किया है।